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मोतिहारी जेल अधीक्षक को व्हाट्सएप वीडियो भेजकर रंगदारी मांगने का मामला, साइबर क्राइम टीम जांच में जुटी

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बिहार के मोतिहारी केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक को व्हाट्सएप पर वीडियो भेजकर रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। धमकी के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर साइबर जांच शुरू की है।

मोतिहारी/आलम की खबर:बिहार के मोतिहारी जिले से एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक को व्हाट्सएप के माध्यम से वीडियो भेजकर रंगदारी मांगने और ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई है। इस घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

मामले के अनुसार, जेल अधीक्षक विजय कुमार अरोड़ा के मोबाइल पर 3 मई को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया, जिसमें कुछ वीडियो भेजे गए। आरोप है कि इन वीडियो को जेल परिसर के अंदर का बताया गया और इन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी गई। इसके साथ ही अपराधियों ने पैसों की मांग शुरू कर दी।

धमकी देने वालों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाया जाएगा, जिससे जेल प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचेगा।

इसके अगले दिन 4 मई को उसी नंबर से फिर कॉल किया गया, जिसमें अपराधियों ने दावा किया कि उनके पास और भी वीडियो मौजूद हैं। इस दौरान उन्होंने जेल अधीक्षक को झूठे मुकदमों में फंसाने और उनकी व्यक्तिगत छवि खराब करने की धमकी भी दी।

लगातार मिल रही धमकियों के बाद जेल प्रशासन ने इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर थाना में कांड संख्या 395/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस अब इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है। साइबर सेल की टीम मोबाइल नंबर की लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर ली जाएगी।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि भेजे गए वीडियो कहां से रिकॉर्ड किए गए और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है। इसके अलावा इस बात की भी जांच हो रही है कि कहीं जेल के अंदर या आसपास के किसी व्यक्ति की भूमिका तो इस साजिश में शामिल नहीं है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला ब्लैकमेलिंग और साइबर रंगदारी से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की घटनाएं गंभीर हैं और इन्हें पूरी सख्ती से निपटा जाएगा।

मोतिहारी में इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और साइबर निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के मामलों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

साइबर अपराध और संस्थागत सुरक्षा पर बढ़ता खतरा

मोतिहारी का यह मामला केवल एक ब्लैकमेलिंग घटना नहीं है, बल्कि यह साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को भी दर्शाता है। डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग अब संस्थागत स्तर पर भी चुनौती बनता जा रहा है।

ऐसे मामलों में तकनीकी जांच के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि संवेदनशील संस्थानों को इस तरह की साजिशों से बचाया जा सके। साइबर अपराधियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई ही इस तरह की घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है।

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